बैकिंग ट्रैक इस्तेमाल करने से पहले गुणवत्ता और अधिकार की कौन-सी जाँच करनी चाहिए?
कवर गायन, लेसन, रिहर्सल और प्रस्तुति की जल्दी जाँच के लिए बैकिंग ट्रैक बनाएँ। उपयोग से पहले गुणवत्ता, प्लेबैक, जगह के नियम और स्रोत के अधिकार जाँचें।
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कवर गायन, लेसन, रिहर्सल और प्रस्तुति की जल्दी जाँच के लिए बैकिंग ट्रैक बनाएँ। उपयोग से पहले गुणवत्ता, प्लेबैक, जगह के नियम और स्रोत के अधिकार जाँचें।
बैकिंग ट्रैक इस्तेमाल करने से पहले गुणवत्ता और अधिकार की कौन-सी जाँच करनी चाहिए?
अंतिम समीक्षा:
एक नज़र में
कवर गायन, लेसन, रिहर्सल और प्रस्तुति की जल्दी जाँच के लिए बैकिंग ट्रैक बनाएँ। उपयोग से पहले गुणवत्ता, प्लेबैक, जगह के नियम और स्रोत के अधिकार जाँचें।
आप इसे प्लेबैक फ़ाइल के रूप में तैयार कर सकते हैं, लेकिन उपयोग से पहले आयोजन स्थल के नियम, स्रोत के अधिकार और ऑडियो गुणवत्ता की जाँच कर लेनी चाहिए।
परिणाम तैयार होते ही जल्दी डाउनलोड कर लें, ताकि कार्यक्रम के दिन साइट या नेटवर्क पर निर्भर न रहना पड़े। फिर उसी उपकरण पर बजाकर देखें जिस पर आप प्रस्तुति देंगे।
आवाज़ घटाई गई फ़ाइल गाने की बनावट और टाइमिंग बनाए रखने के लिए होती है। फिर भी पूरे ट्रैक को सुनकर शुरुआत, अंत और अपने प्रवेश के स्थान एक बार ज़रूर पक्के करें।
यह बैकिंग ट्रैक मेकर उन गायकों के लिए है जो कवर का अभ्यास करते हैं, लेसन लेते हैं या रिहर्सल की तैयारी करते हैं। इसमें गाने से मुख्य आवाज़ घटाकर एक फ़ाइल बनती है जिस पर आप स्वयं गा सकें। मकसद गाने को नया रूप देना नहीं, बल्कि उसी संगीत पर आपकी आवाज़ के लिए जगह बनाना है। इससे कवर का रोज़ का अभ्यास और रिहर्सल की तैयारी एक ही फ़ाइल से हो सकती है। प्रस्तुति से पहले जल्दी जाँच के लिए भी यही फ़ाइल काम आती है।
आवाज़ घटाई गई फ़ाइल गाने की बनावट और टाइमिंग को बनाए रखती है, यानी भूमिका, अंतरा, मुखड़ा और अंत अपनी जगह पर रहते हैं। इसलिए जो क्रम आपने मूल गाने में सीखा है, वही बैकिंग ट्रैक में मिलता है। रिहर्सल में साथी कलाकारों के साथ भी यही क्रम संदर्भ बनता है। फिर भी पूरे ट्रैक को एक बार सुनकर पक्का करें कि शुरुआत और अंत आपकी अपेक्षा के अनुसार हैं। बनावट समझ में आ जाए तो प्रवेश के स्थान याद रखना आसान होता है।
किसी भी अभ्यास या प्रस्तुति में इस्तेमाल से पहले परिणाम की ऑडियो गुणवत्ता स्वयं सुनें। देखें कि मूल गायन कितना बचा है, वाद्य साफ सुनाई देते हैं या नहीं, और कहीं आवाज़ फटी या धुंधली तो नहीं। निजी अभ्यास के लिए छोटी कमियाँ चल सकती हैं, पर श्रोताओं के सामने वही कमियाँ ज़्यादा खटक सकती हैं। इसलिए यह तय करें कि परिणाम किस काम के लिए पर्याप्त है। गुणवत्ता का फैसला पूरी फ़ाइल सुनकर करें, केवल शुरुआती हिस्से से नहीं।
अगर रिहर्सल या प्रस्तुति की तारीख तय है, तो परिणाम को आखिरी समय के भरोसे न छोड़ें। तैयार होते ही फ़ाइल डाउनलोड कर लें और उसे ऐसे नाम से सहेजें जिससे गाना पहचाना जा सके। इससे कार्यक्रम के दिन साइट खोलने या नेटवर्क पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं पड़ती। डाउनलोड की हुई फ़ाइल आपके पास रहे तो अभ्यास कहीं भी किया जा सकता है। समय रहते डाउनलोड करना तैयारी का पहला सुरक्षित कदम है।
डाउनलोड करने के बाद फ़ाइल को उसी फ़ोन, लैपटॉप या प्लेयर पर बजाकर देखें जिसका आप असल में उपयोग करेंगे। सफल डाउनलोड का मतलब यह नहीं कि हर उपकरण पर फ़ाइल बिना दिक्कत चलेगी। लाइव उपयोग से पहले आयोजन स्थल के नियम भी पूछें। साथ ही गाने और रिकॉर्डिंग के अधिकार अलग से जाँचें, क्योंकि बैकिंग ट्रैक बनाना अपने आप अनुमति नहीं देता। प्लेबैक, गुणवत्ता और अधिकार तीनों साफ हों, तभी फ़ाइल पर भरोसा करें।
आप इसे प्लेबैक फ़ाइल के रूप में तैयार कर सकते हैं, लेकिन उपयोग से पहले आयोजन स्थल के नियम, स्रोत के अधिकार और ऑडियो गुणवत्ता की जाँच कर लेनी चाहिए।
परिणाम तैयार होते ही जल्दी डाउनलोड कर लें, ताकि कार्यक्रम के दिन साइट या नेटवर्क पर निर्भर न रहना पड़े। फिर उसी उपकरण पर बजाकर देखें जिस पर आप प्रस्तुति देंगे।
आवाज़ घटाई गई फ़ाइल गाने की बनावट और टाइमिंग बनाए रखने के लिए होती है। फिर भी पूरे ट्रैक को सुनकर शुरुआत, अंत और अपने प्रवेश के स्थान एक बार ज़रूर पक्के करें।
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